Matter and anti matter2

हाँ तो दोस्तों – इस शृंखला के अगले भाग के साथ हाज़िर हूँ | सबसे पहले तो यह कहूँगी कि यह कोई मिथ्या परिकल्पना नहीं है, यह आधारित है ठोस गणित के आधार पर – सिर्फ इतना है – कि हम उस ब्रह्माण्ड तक पहुंचे नहीं हैं{ और यह अच्छा ही है – क्योंकि दोनों ब्रह्मांडों का जोड़ तो विध्वंस ही करेगा🙂 | } वैज्ञानिक इस संभावना पर काम कर रहे हैं |

(1) अब, यह तो हम सब जानते ही हैं कि इस दुनिया में जिसमे हम रहते हैं – हर चीज़ पदार्थ से बनी है | यह पदार्थ जो हम देखते हैं, छूते हैं, उपयोग में लाते हैं – यह अधिकतर “मिश्रित पदार्थ” ( mixtures ) हैं | इनमे से सत्व (pure substances ) अलग किये जा सकते हैं भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा (physical processes) | उदाहरण के लिए – यदि पानी में नमक मिला है (H2O + NaCl) – तो पानी को सुखा कर भाप बनाया जाए एक ट्यूब के द्वारा कही और पहुंचा कर , दूसरी जगह फिर से इस भाप को ठंडा कर के  पानी बना दिया जाए और पीछे रह जाएगा शुद्ध नमक – जो भाप नहीं बनेगा | जब यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती – अर्थात भौतिकी तरकीबें अब काम नहीं करतीं – तो हम “मिश्रित पदार्थ” ( mixtures ) को आपने सत्व (pure substances ) में अलग कर चुके हैं | 

(2) अब यह जो सत्व अलग हुए हैं, इन्हें यह दो तरह के होते हैं – मूल तत्त्व (elements) और उनके संयोजन (compounds) जो मूल तत्त्व हैं – वे तो शुद्ध रूप में हैं, किन्तु जो संयोजन हैं उन्हें अब रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा आपने घटक मूल तत्त्वों में तोडा जा सकता है | उदहारण के लिए – ऊपर के उदहारण में पानी और नमक (जो सत्त्व अलग हुए थे) दोनों ही संयोजन हैं | पानी है H2O जिसके एक कण में मूल तत्त्व हाइड्रोजन के दो कण हैं, और ओक्सिजन का एक कण – तो इन्हें अलग करना भौतिकी प्रक्रियाओं द्वारा संभव नहीं – इन्हें रासायनिक तरीके से ही तोडा जा सकेगा | इसी तरह से NaCl के एक कण में भी , एक कण सोडियम और एक कण क्लोरिन है – जिन्हें अलग किया जा सकता है |

अब जो मूल तत्त्व हैं – उन पर आते हैं | यह सारिणी देखिये :

इस सारिणी में आप देख सकते हैं कि मूल तत्त्व एक निश्चित क्रम में जमे हैं, और यह हम मानवों की बनाई हुई सारिणी नहीं है | प्रकृति में ये मूल तत्त्व एक योजनाबद्ध तरीके से ही मौजूद हैं – हम मनुष्यों ने यह सारिणी सिर्फ उस तरीके को समझ कर, वर्णन करने और अध्ययन करने के लिए बनाई है | {…… पहला मूल तत्त्व हाइड्रोजन है – फिर हीलियम ; फिर अगली पंक्ति में – लिथियम, बेरिलियम, बोरोन, कार्बन, नाइटरोजन,  ओक्सिजन, फ्लुरिन, नियोन ; फिर अगली पंक्ति में सोडियम , मग्निशियम आदि …..} 

(3) यह मूल तत्त्व भी पने कणों में तोड़े जा सकते हैं | एक उदाहरण के लिए – एक ग्राम हाइड्रोजन में अंदाज़न –> 
      ६.०२३ गुणा १००,०००,०००,०००,०००,०००,०००,००० 
     ( = ६.०२३ क्ष १० पॉवर २३ )
     ( = १ अवोगाड्रो नंबर या मोल )

शुद्ध हाइड्रोजन कण हैं – जिनमे से हर एक कण में मूल तत्त्व  हाइड्रोजन के सारे गुण मौजूद हैं – हर एक कण वह सब रासायनिक और भौतिकी गुण रखता है – जो कि इस मूल तत्त्व हाइड्रोजन के हों |

अब इसके आगे इन कणों में क्या है – इसकी चर्चा हम इस सीरीज की अगली पोस्ट में करेंगे | 

Posted on November 25, 2011, in पदार्थ, ब्रह्माण्ड, विज्ञान. Bookmark the permalink. Leave a comment.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: