matter antimatter 3

अनुवाद आभार – आदरणीय गिरिजेश राव जी |


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अब तक हमने देखा –> 
{चाहें तो यह भाग जो नीले रंग में है, इसे छोड़ कर नीचे नए भाग को देखें }
*1* पदार्थ के मिश्रणों को भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा पहले तो सत्वों (substances) में अलग अलग किया जा सकता है | [ जो या तो मूल तत्व (ELEMENTS ) या उनके संयोजन / यौगिक (COMPOUNDS )} हो सकते हैं ] 
*2* इसके बाद और फिर रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा मूल तत्त्व अलग किये जा सकते हैं | मूल तत्त्व [elements ] प्रकृति में करीब करीब ११० हैं, जिनके कई तरह के संयोजन और मिश्रणों से बने पदार्थों से वह हर चीज़ बनी हुई है जो हम अपने आस पास देखते हैं | 
*3* [जैसे समुद्र का पानी एक मिश्रण (mixture ) है, जिसमे सत्व (substances ) हैं – शुद्ध पानी, नमक रेत आदि | इन सब को भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा  अलग अलग किया जा सकता है  | 
*4* अब जो शुद्ध पानी हमें मिलेगा – वह एक यौगिक संयोजन (compound ) है – जिसमे मूल तत्त्व (elements ) हैं हाईड्रोजन और ओक्सिजन ]
*5* संयोजन अणुओं से बने हुए हैं [compounds are made up of molecules] ….. और तत्त्व परमाणुओं से बने हुएहैं | ( elements are made up of atoms) 

जिस अनुपात (ratio ) में संयोजन अपने घटक (component ) तत्त्वों के जोड़ हैं, ठीक इसी रूप में उन संयोजनों के मूल “अणु” उन्ही परमाणुओं के उस ही अनुपात में जोड़ हैं | उदाहरण के लिए, पानी (water ) एक संयोजन है जिसमे गिनती के अनुपात में देखा जाए तो एक भाग  पानी में दो भाग हाईड्रोजन और एक भाग ओक्सिजन है तो ——- पानी के एक अणु में भी दो हाईड्रोजन के परमाणु और एक ओक्सिजन का परमाणु है | परन्तु इसे भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा नहीं तोडा जा सकता, हाँ रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा ज़रूर तोड़ा जा सकता है और हाईड्रोजन और ओक्सिजन को अलग किया जा सकता है | कौनसे परमाणु किस अनुपात में जुड़ेंगे यह उनकी संयोजकता पर निर्भर है, जो हम यहाँ (नीचे) देखेंगे |
]
अब आगे …

यहाँ तक तो हमने यह देखा कि – हर मूल तत्त्व को उसके घटक अणुओं तक  तोडा जा सकता है | इनमे से हर एक अणु में वह सारे गुण देखे जा सकते हैं, जो उस मूल तत्त्व के गुण हैं |  यहाँ इसके बारे में अक्सर लोगो को भ्रान्ति है कि अणु के नीचे हम पदार्थ को तोड़ नहीं सकते | यह गलत जानकारी है | तथ्य यह है कि अणु को तोडा तो जा सकता है, परन्तु अब जो घटक मिलेंगे, वे घटक युनिवर्सल हैं | [ यह कुछ कुछ भारतीय दर्शन में जो कहा गया है कि हर वास्तु पञ्च-महाभूतों से बनी है – वैसा ही है | ] अर्थात, उन घटकों में मूल तत्त्व के गुण नहीं दीखते | ये घटक हैं, इलेक्ट्रोन, प्रोटोन, और न्यूट्रोन | ये घटक चाहे हाइड्रोजन के परमाणु से आये हों या फिर ओक्सिजन से, या अल्युमिनियम से या किसी भी और मूल तत्त्व से – इनके स्त्रोत से इनके गुणों पर कोई फर्क नहीं पड़ता | हर एक मूल तत्त्व से मिला इलेक्ट्रोन एक ही तरह का होगा – इलेक्ट्रोन को पाकर यह बताया नहीं जा सकता कि यह मूलतः किस मूल तत्त्व के परमाणु में था !!!                       

एक अणु के भीतर मुख्य रूप से ३ तरह के कण हैं – इलेक्ट्रोन, प्रोटोन, और न्यूट्रोन – इन्हें एक एक कर समझते हैं – इस पोस्ट में सिर्फ इलेक्ट्रोन पर ही बात हो पाएगी |

१. इलेक्ट्रोन 
 ये कण बहुत ही हलके हैं | जिस तरह सौरमंडल में धरती, मंगल आदि ग्रह सूर्य के आसपास घूमते रहते हैं, उसी तरह ये परमाणु के नाभिक [“न्युक्लिअस”] के आस पास घूमते रहते हैं | इनमे ऋणात्मक आवेश ( निगेटिव चार्ज) है | इलेक्ट्रोन अपने अणु को छोड़ कर दूसरे अणु से भी जुड़ सकते हैं | तो वह जो अणु पहले न्यूट्रल था, अब पोजिटिव आयन (धनात्मक) हो गया, क्योंकि निगेटिव इलेक्ट्रोन उसे छोड़ कर चला गया | इसी प्रकार, जिस अणु में यह इलेक्ट्रोन जुड़ गया है अब , वह भी पहले न्यूट्रल था – लेकिन अब इस इलेक्ट्रोन के आ जाने से यह अब निगेटिव आयन (धनात्मक) हो गया | 

अब यह तो हम जानते ही है कि पोजिटिव और निगेटिव एक दूसरे को अपनी ओर खींचते हैं | तो जो पहले वाला अणु पोजिटिव हो गया है, और दूसरा जो निगेटिव हो गया है – एक दूसरे को खींचने लगते हैं, और इनकी “जोड़ी” बन जाती है | या आसानी से अलग नहीं किये जा सकते हैं अब | इस गठजोड़ को “इलेक्ट्रो वेलेंट बोंड” या विद्युत्-संयोजित बन्ध कहते हैं |

यह इलेक्ट्रोन का देना और लेना हर जगह और मनमाने तरीके से नहीं होता | हर मूल तत्त्व में एक निश्चित मात्रा में इलेक्ट्रोन हैं, जो अपनी अपनी “कक्षा” (orbit ) में नाभिक (nucleus ) के आस पास घूम रहे हैं | पिछले भाग में मैंने जो सारिणी दी थी, उसे फिर से यहाँ दिखा रही हूँ | जो तत्त्व जिस स्थान पर है, उसमे उतने ही इलेक्ट्रोन हैं (और आगे देखेंगे कि उसके नाभिक में उतने ही प्रोटोन भी हैं ) 

अब देखें कि हर कक्षा में कितने इलेक्ट्रोन हो सकते हैं?? पहली – सबसे भीतर वाली कक्षा में अधिकतम दो ,दूसरी में आठ आदि | यह कक्षा संख्या को यदि “n ” माना जाए, तो उसमे अधिकाधिक  इलेक्ट्रोन जा सकेंगे – और जिस मूल तत्त्व में जितने इलेक्ट्रोन होंगे – कक्षा में उस से अधिक ( 2 x n x n ) इलेक्ट्रोन भरे जा सकते हैं | 

कक्षा     इलेक्ट्रोन की अधिकतम संख्या    यहाँ तक योग संख्या 
१             २.१.१ = २                                   २ 
२            २.२.२ = ८                                  २+८=१०   
३            २.३.३ = १८                                १०+१८ = २८ 
आदि   


अब जिस तत्त्व में जितने इलेक्ट्रोन हैं, उस तरह से या तो कक्षा पूरी भरी रह सकती है , या कुछ खाली रह सकती है – और हर परमाणु की कोशिश रहती है कि सबसे बाहर की कक्षा या तो पूरी भरी हो ( H और He के लिए २ इलेक्ट्रोन ) या फिर बाहरी कक्षा में ८ इलेक्ट्रोन हों | इसे पूरा करने के लिए अणु को जो आसान हो – १,२,या ३ इलेक्ट्रोन लिए जा सकते है , या १,२,या ३ इलेक्ट्रोन दिए जा सकते हैं, या ४ इलेक्ट्रोन शेयर किये जा सकते हैं | (उदाहरण के लिए – यदि बाहर ७ इलेक्ट्रोन हों, तो या तो ७ दे दिए जाएँ या फिर १ ले लिया जाए – निश्चित ही एक लेना आसान है ७ देने की अपेक्षा ) ऊपर हमने देखा कि यदि एक ने दूसरे को इलेक्ट्रोन दिए, तो पहला + और दूसरा – बन जाएगा और ये दोनों विद्युत् संयोजी बन्ध द्वारा संयोजित हो जायेंगे | यदि शेयर किये, तो यह बनेगा सह-संयोजित बन्ध | इस बार भी दोनों अणुओं को साथ रहना पड़ेगा क्योंकि अब यह शेयर्ड इलेक्ट्रोन दोनों के नाभिकों का चक्कर लगाने लगे हैं |

तत्त्व    इलेक्ट्रोन   कितनी       इलेक्ट्रोन       बाहरी कक्षा       ८ की गिनती पूरी      संयोजकता 
           संख्या        कक्षाएं?      का वितरण   में इलेक्ट्रोन       करने को कितने       / वेलेंसी 
                                                                                           इलेक्ट्रोन  देने हैं 

H          1                 १                      १              १               १ दे या ले सकता है    +१  या – १ 

He        2                 १                      २              २               पूर्ण है – तो शून्य |     संयोजन 
                                                                                         न देगा ना लेगा |        नहीं करेगा          

Li         3                 २                    २+१           १                     १ देगा                            +१   

Be        4                 २                   २+२            २                   २ देगा                            +२   



B          5                 २                    २+ ३         ३                    ३ देगा                            +३ 



यहाँ तक + संयोजकता हुई, अब सह संयोजकता और अब- संयोजकता
तत्त्व    इलेक्ट्रोन   कितनी       इलेक्ट्रोन       बाहरी कक्षा       ८ की गिनती पूरी      संयोजकता 
           संख्या        कक्षाएं?      का वितरण   में इलेक्ट्रोन       करने को कितने       / वेलेंसी 
                                                                                           इलेक्ट्रोन लेने हैं 

C          6                 २                    २+४          ४                 शेयर करेगा               सह-संयोजन   



N          7                 २                    २+५         ५                  ३ लेगा                             -३  


O          8                 २                    २+६          ६                    २ लेगा                           -२   


F           9                २                    २+७          ७                   १ लेगा                            -१     


Ne       10               २                     २+८          ८               पूर्ण है – तो शून्य |        संयोजन 

                                                                                         न देगा ना लेगा |          नहीं करेगा 

यह चित्र देखें, किस तरह की व्यवस्था बद्ध संरचना होती है |

जिस तत्त्व की संयोजकता + हो, वह – संयोजकता वाले तत्त्व से उस अनुपात में जोड़ कर सकता है जिससे दोनों की संयोजकता संतुष्ट हो | जैसे 

Na {+१} और Cl {-१} का जोड़ है NaCl [खाने का नमक ]

H {+१} और O {-२} का जोड़ है (२H +१ ओ = H2O ) [पीने का पानी ]

अगले अंक में प्रोटोंस, न्युट्रोंस और आइसोटोप्स की बात होगी |
जारी …

Posted on November 25, 2011, in पदार्थ, ब्रह्माण्ड, विज्ञान. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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