cryptography steganography

 

जब से मानव ने दूरियों पर सन्देशों का आदान प्रदान शुरू किया, तो इसके साथ ही प्रश्न उठा सन्देश की सुरक्षा का । इसमें कुछेक बातें ये भी हैं :

1. सन्देश गलत व्यक्तियों को न मिलें (जैसे कोइ सैन्य संदेश) – authentication

2. बीच राह में कोई सन्देश को रोक या पढ या समझ न पाए (जैसे कोई प्रेमपत्र)। – confidentiality

3. सन्देश लेखक के सन्देश लिखने के बाद कोई और उसे न तो बदल पाए, न ही काट छांट पाए (जैसे आपने किसी के लिए 100 रुपये का चेक भेज – उसे वह 1000 न बना पाए)। – message integrity

4. सन्देश भेजने वाला भी बाद में अपने लिखे से मुकर न पाए (जैसे किसी काम के लिए कोई वस्तु किसी ने किसी को देने का वादा किया, और अपना काम निकल जाने पर वह कहे कि , मैंने ऐसा कोई वादा नहीं किया था )। – non-repudiation

 

इन में से पहले दो काम स्टेग्नोग्राफी और क्रिप्टोग्राफी से होते हैं ।

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क्रिप्टोग्राफी

इसमें सन्देश को किसी तरह के गोपनीय कोड से “एनक्रिप्ट” कर के भेजा जाता है । फिर उसे पढने की गोपनीय जानकारी हुए बिना दूसरा पक्ष उसे देख भी सके तो भी पढ़ नहीं सकता । इसमें दो मुख्य पद्धतियाँ हैं : secret key और public key ।

 

Secret key : इसमें भेजने वाले और पढने वाले दो ही लोग अपनी आपसी शेअर्ड चाबी  जानते हैं । पूरी दुनिया यह तो जानती है की एनक्रिप्शन कैसे होता है, किन्तु चाबी न होने से उसे पढ़ने के लिए ताला खोल नहीं सकती  ( प्रयास कर कर के खोल भी पाए – तो तब तक इतनी देर हो चुकी हो कि उससे कोई नुक्सान न कर पाए) । हर अलग मूल सन्देश (plaintext) को एक ही चाबी से या (एक ही सन्देश को अलग चाबी से ) एनक्रिप्ट करने पर अलग अलग सन्देश बनते हैं – जिन्हें ciphertext कहा जाता है । उसे पढ़ वही सकता है जो चाबी जानता हो  । हम सब  ने ही शायद बचपन के खेलों आदि में ऐसी कूटभाषा प्रयुक्त की होगी । जासूसी में , सेना में, और प्रेमपत्रों में यह सब खूब प्रयोग होता है ।

 

हिटलर साइफर बड़ा प्रसिद्ध उदाहरण है ।

इस तकनीक का एक उदाहरण :

Message : my name is shilpa

Technique : substitution

Key : gap = +2

 

Original        : a b c d e f g h  j k  l m n o p q r s t u  v w x y z  1 2 3 4 5 6 7 8 9

Substituted   : c d e f  g  i j k l m n o p q r s  t u v w x y z  0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 a b

 

तो माय नाम इस शिल्पा का उत्तर बना :

my name is shilpa

= o0 pcog ku ujknrc

 

यही सन्देश ” my name is shilpa” एक दूसरी “की” से एनक्रिप्ट करने पर सन्देश बनेगा :

o|$sgtm)s~, vx|s

 

इस तरह हर अलग की से एक ही सन्देश के अलग अलग रूप बनेंगे, जिन्हें तोड़ कर मूल सन्देश पाने के लिए की जानना आवश्यक है । हर प्रेषक हर एक मित्र के साथ अलग अलग की इस्तेमाल कर सकता है, जो एक दुसरे की की नहीं जानते तो वे सिर्फ अपने सन्देश पढ़ सकते हैं ।

 

इसे तोडना बड़ा आसान है : क्योंकि सारी दुनिया जानती है कि substitution हुआ है , तो वे एक एक कर के सब चाबियां try कर सकते हैं । लेकिन चाबी की लम्बाई इतनी अधिक हो कि  trials में इतना समय लग जाए कि वह सन्देश अपना महत्व खो दे – तो यह तकनीक सफल होगी । इसी तरह की और भी कई अल्गोरिदम हैं । जितनी बड़ी चाबी हो, उतना मजबूत ताला होता है । साधारण पत्रों के लिए अलग तरह की सुरक्षा, बैंक आदि के लिए अलग, और सेना के लिया और अधिक कड़े सुरक्षा इंतज़ाम (longer keys ) होते हैं ।

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स्टेगनोग्राफी :

यहाँ सन्देश को छुपा कर भेजा जाता है । जैसे व्यक्ति x , किसी और व्यक्ति y  को एक चित्र भेजे और उसमे छुपा कर एक सन्देश भी । अब दुनिया अक्सर यह जान ही नहीं पाती की इस चित्र / गीत / विडिओ आदि में कोई छुपा सन्देश मौजूद भी है । जान भी जाए, तो चित्र में इतने अधिक 1 और 0 के सेट्स हैं, की उसमे से सन्देश खोज निकालना करीब करीब असंभव सा है ।

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पहला चित्र :

 

 

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सन्देश : my name is shilpa

सन्देश छुपा कर बना चित्र :

 

 

 

 

अब देखने में दोनों चित्रों में कोई फर्क नहीं है, किन्तु दुसरे चित्र में यह मेसेज छुपी है – जो कोई अनजान व्यक्ति जान भी न सकेगा, खोज पाना तो खैर बहुत दूर की बात है🙂 – ढूँढने की कोशिश न कीजियेगा , समय व्यर्थ होगा, क्योंकि इसे आँख से देख कर तो नहीं ही खोजा जा सकता है ।

 

यह स्टेग्नोग्राफी कई रूपों में प्रयुक्त होती रही है । जैसे नीम्बू के रस से लिखना, जो सूखे कागज़ पर न दिखे, किन्तु ख़ास माध्यम में दिखे । इसी तरह से युद्ध के समय सर मुंडा कर उस पर सन्देश टैटू कर दिए जाते थे, जो बाद में बाल उग आने से छुप जाते थे । एक और तरीका था – साधारण लैटर टाइप किया जाए, औरुसका चित्र लिया जाए । फिर हर “i” के ऊपर का dot  हटा कर उसकी जगह जो डॉक्यूमेंट भेजना हो, उसका चित्र माइक्रो डॉट बना कर चिपका दिया जाए । सन्देश पाने वाली पार्टी इस “i ” को फिर से बड़ा कर ले, और वह डॉक्यूमेंट पहुँच जाए ।

 

फिलहाल तो रिसर्च के सिलसिले में इससे सम्बंधित कुछ काम कर रही थी – सोचा शेयर किया जाए आप सब के साथ🙂

Posted on December 1, 2012, in Uncategorized. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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